
Panditji Book for puja in Noida
मंदिरों में घण्टा लगाने का क्या अभिप्राय है? धार्मिक दृष्टि से विश्लेषण
प्रथम तो घण्टे की आवाज सुनकर लोग समझ जाते हैं कि मंदिर में आरती प्रारम्भ हो चुकी है। इस प्रकार जो व्यक्ति आरती में सम्मिलित होने के इच्छुक रहते हैं, वे उसमें सम्मिलित हो जाते हैं।
दूसरा कारण यह है कि मंदिर में प्राण प्रतिष्ठित देवता भी जागृत हो जाएँ, अन्यथा जब हम उनके दर्शनों को जाते हैं तो हो सकता है वे उस समय समाधि में लीन हों और हमारी पूजा व्यर्थ हो जाए।
घण्टे की ध्वनि यदि लयबद्ध ढंग से की जाए तो वह कानों को प्रिय लगती है और मन को एकाग्र करती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घण्टे की ध्वनि से अमंगल कारकों का निवारण होता है।
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घण्टा और सृष्टि का प्रारम्भ – पुराणों की दृष्टि से
पुराणों और धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार, जब प्रलय के बाद सृष्टि का पुनः आरम्भ हुआ, तब सबसे पहले जो ध्वनि उत्पन्न हुई वह घण्टे की ध्वनि के समान थी।
इसलिए, यह ध्वनि ब्रह्मांडीय ऊर्जा को जगाने वाली मानी जाती है। मंदिरों में घण्टा इसी ऊर्जा को सक्रिय करने का माध्यम है।
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धार्मिक दृष्टिकोण से घण्टा बजाने के प्रमुख कारण
1. देवताओं को जागृत करना
जब भक्त मंदिर में प्रवेश करता है, तो घण्टा बजाकर देवता को अपनी उपस्थिति का संकेत देता है। इसे एक धार्मिक संवाद माना गया है।
2. एकाग्रता और ध्यान केंद्रित करना
घण्टे की ध्वनि मानसिक विकारों को दूर करती है और व्यक्ति को वर्तमान में रखती है।
इससे ध्यान, पूजा और मंत्रों में मन अधिक लगता है।
3. नकारात्मक ऊर्जा का शमन
ध्वनि विज्ञान के अनुसार, घण्टे की ध्वनि विशेष आवृत्ति पर होती है जो वातावरण में व्याप्त नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करती है।
4. पंचतत्त्वों का संतुलन
घण्टा पंचतत्त्वों – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश – का प्रतिनिधित्व करता है। इसे बजाने से इन तत्वों का संतुलन बना रहता है।
5. शुभ संकेत और आरंभ का प्रतीक
मंदिर में घण्टा बजाना किसी पवित्र कर्म की शुरुआत का प्रतीक माना गया है। जैसे घर में कोई शुभ कार्य आरम्भ करने से पहले शंख या घण्टा बजाया जाता है, वैसे ही मंदिर में भी पूजा की शुरुआत घण्टा बजाने से होती है।
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वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी मान्य
आधुनिक विज्ञान भी यह मानता है कि घण्टे की ध्वनि अल्फा वेव उत्पन्न करती है जो मस्तिष्क को शांति देती है।
इसीलिए मंदिरों में घंटा बजाने की परंपरा धर्म और विज्ञान दोनों से जुड़ी हुई है।
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निष्कर्ष
मंदिर में घण्टा केवल परंपरा नहीं, बल्कि धार्मिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह न केवल आरती का संकेत देता है, बल्कि हमारे मन को एकाग्र करता है, वातावरण को शुद्ध करता है और हमारे ईश्वर से जुड़ाव को गहराता है।
“घण्टा बजाओ और अपने भीतर की नकारात्मकता को दूर भगाओ।”
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