
Book Panditji in Greater Noida
🙏 क्यों ‘आत्मा’ को पुरुष और ‘परमात्मा’ को परम पुरुष कहते हैं?
शरीर रूपी ‘पुर’ (गाँव, घर) में आत्मा निवास करती है, इसलिए विद्वानों ने इसे पुरुष की उपाधि दी। चूंकि परमात्मा (परम + आत्मा) सर्वव्यापी, सर्वशक्तिमान और सर्वज्ञ है, इसलिए उसे परम पुरुष कहा गया है। परमात्मा सभी पुरुषों में श्रेष्ठ है, अतः परमपुरुष कहना बिल्कुल उचित है।
अब इसी विचार को और गहराई से समझते हैं 👇
🧘♂️ 1. आत्मा और शरीर का संबंध
हमारा शरीर केवल एक निवास स्थान है — एक पुर।
इस ‘पुर’ में जो चेतना, ऊर्जा और जीवन का संचार करती है, वही आत्मा है।
➡️ आत्मा = निवासी
➡️ शरीर = निवास
इसी कारण आत्मा को पुरुष कहा गया — जो पुर में रहने वाला है।
Book Panditji in Greater Noida
🌟 2. परमात्मा क्यों “परम पुरुष”?
परमात्मा किसी एक शरीर तक सीमित नहीं है।
वह सभी का कर्ता, नियन्ता और आधार है।
- वह हर कण में है
- हर जीव में है
- हर दिशा में है
- हर नियम में है
इसीलिए परमात्मा सर्वव्यापी पुरुष माना गया।
और चूँकि कई पुरुष (आत्माएँ) हैं, पर उनसे श्रेष्ठतम, सर्वोच्च, सर्वाधार एक ही है—
👉 परम पुरुष — अर्थात् ईश्वर।
Book Panditji in Greater Noida
🧿 3. वेदों और उपनिषदों में पुरुष का अर्थ
वेदों में “पुरुष” शब्द दो अर्थों में मिलता है:
1️⃣ पुर में स्थित — अर्थात आत्मा
2️⃣ सर्वत्र व्याप्त चेतना — परमात्मा
उपनिषद कहते हैं:
“सब पुरुष वही एक परम पुरुष है, बाकी सब उसकी अभिव्यक्ति है।”
🔱 4. पुरुषसूक्त में ‘पुरुष’ का विस्तार
ऋग्वेद के पुरुषसूक्त में भगवान को
✨ सहस्रशीर्षा पुरुषः
कहा गया है—
अर्थात् सहस्र सिरों वाला, यानी सभी प्राणियों में विद्यमान।
यहाँ स्पष्ट है कि
- जीव = पुरुष
- परमात्मा = परम पुरुष (अनन्त पुरुष)
Book Panditji in Greater Noida
🌀 5. माया और परम पुरुष
विश्व की सारी रचना, गति और नियम माया कहलाते हैं।
परमात्मा स्वयं इस माया के पीछे की चेतना है।
- वह माया को चलाता है
- उससे घिरता नहीं
- उसमें बंधता नहीं
इसीलिए उसे परम पुरुष कहा गया—जो सबमें है पर किसी में बंधा नहीं।
Book Panditji in Greater Noida
🌼 6. सरल सारांश
- “पुरुष” शब्द का अर्थ है — जो शरीर रूपी पुर में रहता है, यानी आत्मा।
- परमात्मा सबमें व्याप्त है इसलिए उसे परम पुरुष कहा गया।
- वेद, उपनिषद और पुराण—all confirm that परम पुरुष ही सृष्टि का मूल कारण है।
- आत्मा अनेक हैं लेकिन परम पुरुष एक ही है।
🙏 निष्कर्ष
आत्मा और परमात्मा दोनों को “पुरुष” कहना शास्त्रीय दृष्टि से योग्य है,
परंतु परम पुरुष केवल वही है जो:
1.✨ सर्वत्र है
2.✨ सर्वज्ञ है
3.✨ सर्वशक्तिमान है
4.✨ और सबका मूल है
यही कारण है कि परमात्मा को “परम पुरुष” कहना पूर्णतया तर्कसंगत है।
Book Panditji in Greater Noida
